How are volcanoes formed: ज्वालामुखी कैसे बनते हैं? जानिए इसके पीछे की पूरी सच्चाई

How are volcanoes formed: ज्वालामुखी कैसे बनते हैं? जानिए इसके पीछे की पूरी सच्चाई

How are volcanoes formed : नमस्कार दोस्तों, ज्वालामुखी का नाम सुनते ही मन में एक अजीब-सी हलचल पैदा होती है मतलब रोमांच और भय दोनों एक साथ क्योंकि ज्वालामुखियों के बारे में जानना जितना रोमांचक है उतना ही डरावना भी है। दूर से देखने पर यह किसी लाल चमकती नदी जैसा खूबसूरत लगता है, लेकिन इसी खूबसूरती के भीतर छिपी होती है वो विनाशक शक्ति, जो पलक झपकते ही जंगलों को राख में बदल दे और पहाड़ों को ऐसे पिघला दे जैसे मोमबत्ती पिघलती है।

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वैसे तो ज्वालामुखियों के नुकसान भी हैं और फायदे भी हैं। क्योंकि कहीं यह धरती को नए द्वीप देते हैं तो कहीं उपजाऊ मिट्टी। कहीं यह गर्म पानी के झरने बनाते हैं तो कहीं पूरे शहरों को इतिहास का हिस्सा बना देते हैं। लेकिन असली सवाल यही है इनका फायदा ज्यादा है या नुकसान? और क्या वाकई यह हमारे लिए वरदान है या एक चलता फिरता खतरा?

चलिए आज के इस आर्टिकल में हम आपको ( How are volcanoes formed ) ज्वालामुखी कैसे बनते हैं से लेकर ज्वालामुखी के बारे में सम्पूर्ण जानकारी साझा करने वाले है इसलिए आर्टिकल में लास्ट तक बने रहें । चलिए जानते है –

How are volcanoes formed – ज्वालामुखी कैसे बनते हैं?

How are volcanoes formed - ज्वालामुखी कैसे बनते हैं?

अगर पृथ्वी को एक विशाल उबलते हुए गेंद की तरह माने तो हम जिस पर खड़े हैं वह सिर्फ उसकी पतली ठंडी बाहरी परत है जिसे हम क्रस्ट कहते हैं। क्रस्ट के नीचे मेंटल परत है और उसके नीचे बहता हुआ पिघला धातु – मैग्मा।

यही मैग्मा कई जगहों पर दबाव बनाकर ऊपर आने की कोशिश करता है, लेकिन धरती क्रस्ट कई टेक्टॉनिक प्लेटों में बंटी है, जो एक विशाल ढक्कन का काम करती हैं। जब इन प्लेटों के बीच गैप बनता है या दबाव बहुत बढ़ जाता है, तब यही लावा तेजी से ऊपर आता है और ज्वालामुखी का जन्म होता है।

डायवर्जेंट और कन्वर्जेंट बाउंड्रीज – जहां धरती दरकती है

जब प्लेटें एक-दूसरे से दूर होती हैं, तो नीचे का गर्म मैग्मा ऊपर खिंचकर आता है और ज्वालामुखी बन जाता है। यह प्रक्रिया समुद्रों के नीचे सबसे ज्यादा होती है, इसलिए पानी के नीचे सबसे ज्यादा ज्वालामुखी पाए जाते हैं। दूसरी ओर, जब दो प्लेटें आपस में टकराती हैं, तो एक प्लेट नीचे धंसती है और दूसरी ऊपर चढ़ जाती है। इस टक्कर से बनने वाला दबाव इतना ज्यादा होता है कि दुनिया के सबसे खतरनाक ज्वालामुखी इसी प्रक्रिया से पैदा होते हैं।

हॉटस्पॉट्स – जहां ज्वालामुखी बिना वजह भी फट सकते हैं

अगर प्लेटें न हिल रही हों, न टकरा रही हों तो क्या ज्वालामुखी फिर भी फट सकता है? इसका जवाब है – हाँ! हॉटस्पॉट्स धरती के किसी भी हिस्से में बन सकते हैं, चाहे प्लेटों की गति कुछ भी हो। हवाई द्वीप इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जो एक-एक करके ज्वालामुखी विस्फोटों से बना है। ये हॉटस्पॉट वो जगहें हैं जहां धरती के अंदर की गर्मी ऊपर आने का रास्ता खुद बना लेती है।

ज्वालामुखी अंदर से कैसा दिखता है?

ज्वालामुखी अंदर से कैसा दिखता है?

एक ज्वालामुखी की संरचना तीन मुख्य भागों पर आधारित होती है –

  • मैग्मा चेंबर (पिघले लावे का विशाल समुद्र)
  • कंड्यूट (ऊपर जाने का रास्ता)
  • क्रेटर (जहां से विस्फोट होता है)।

जब मैग्मा चेंबर में इतना दबाव बन जाता है कि धरती की मोटी चट्टानें भी उसे रोक नहीं पातीं, तभी ज्वालामुखी फटता है। ये विस्फोट सिर्फ लावा ही नहीं बल्कि गर्म गैसें, राख, लावा बम और कभी-कभी बिजली जैसे तूफान भी पैदा करते हैं।

ज्वालामुखियों के प्रकार-

मुख्यतः ज्वालामुखी तीन प्रकार के होते है – शील्ड, स्ट्रैटो और कालडेरा

1. शील्ड वोल्केनो

ये चौड़े, फैले हुए और बहुत हल्के ढलानों वाले ज्वालामुखी होते हैं। इनसे निकलने वाला लावा पतला और गर्म होता है, जो पानी की तरह बहता है। हवाई का मोनालोवा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है – धरती का सबसे विशाल ज्वालामुखी।

2. स्ट्रैटो वोल्केनो

इनका लावा गाढ़ा होता है, इसलिए मैग्मा ऊपर नहीं निकल पाता और भीतर दबाव बढ़ता जाता है। फिर अचानक यह एक बड़े धमाके के साथ फटते हैं। माउंट फुजी, क्राकाटोआ, और माउंट सेंट हेलेंस इसी प्रकार के ज्वालामुखी हैं।

3. कालडेरा वोल्केनो (सुपर वोल्केनो)

ये सबसे खतरनाक ज्वालामुखी होते हैं। एक सुपर विस्फोट पूरा मैग्मा चेंबर खाली कर देता है और कई हजार परमाणु बमों जितनी ऊर्जा छोड़ता है। येलोस्टोन और टोबा इसका उदाहरण हैं, जिन्होंने पृथ्वी के मौसम को भी बदल दिया था।

इतिहास के सबसे खतरनाक ज्वालामुखी विस्फोट

क्राकाटोआ (1883) : इतिहास का सबसे तेज धमाका। आवाज 4800 किमी दूर ऑस्ट्रेलिया तक सुनी गई। 40 मीटर ऊंची सुनामी ने हजारों जानें लीं।

माउंट पिनातुबो (1991) ; 20वीं सदी का दूसरा सबसे बड़ा विस्फोट। 35 किमी ऊंची राख की दीवार ने पृथ्वी का तापमान 0.5°C गिरा दिया।

माउंट वेसुवियस (69 AD): इस विस्फोट ने पोम्पेई और हरकुलेनियम जैसे शहरों को कुछ ही घंटों में मिट्टी के नीचे दफन कर दिया।

क्या भारत में ज्वालामुखी फट सकता है?

चिंता की बात नहीं। भारत का ज्यादातर हिस्सा ज्वालामुखी के लिए सुरक्षित माना जाता है क्योंकि भारत की टेक्टॉनिक प्लेट काफी स्थिर है। भारत में केवल एक ही सक्रिय ज्वालामुखी है—बैरन आइलैंड, जो अंडमान-निकोबार में समुद्र के बीचों-बीच स्थित है। यहां छोटे-मोटे विस्फोट होते रहते हैं, लेकिन यह आबादी से बहुत दूर है |

ज्वालामुखियों के फायदे

ज्वालामुखी  के फायदे
ज्वालामुखी के फायदे

हालांकि ज्वालामुखी विनाशक होते हैं, लेकिन वे कई फायदे भी देते हैं। ठंडा हुआ लावा दुनिया की सबसे उपजाऊ मिट्टी बनाता है। सोना, चांदी, तांबा और हीरे जैसे खनिज इन्हीं प्रक्रियाओं से बनते हैं। ज्वालामुखी नए द्वीप बनाते हैं और जियोथर्मल ऊर्जा भी प्रदान करते हैं, जो भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा का एक बड़ा स्रोत है।

इथियोपिया का हालिया विस्फोट

हाल ही में इथियोपिया में जो ज्वालामुखी फटा, उसका कारण टेक्टॉनिक प्लेटों का लगातार सरकना था। यह सुपर वोल्केनो नहीं है, लेकिन फिर भी बेहद खतरनाक माना जा रहा है। वैज्ञानिक इसके डेटा से खुश भी हैं, क्योंकि इससे धरती के अंदर के बदलावों को समझने में मदद मिलती है, लेकिन आसपास के इलाकों की सुरक्षा चिंता का विषय है।

निष्कर्ष ;

आज के इस आर्टिकल में हमने आपको ( How are volcanoes formed ) ज्वालामुखी कैसे बनते हैं से लेकर ज्वालामुखी के बारे में सम्पूर्ण जानकारी साझा करने वाले है, आशा करते है की आपको यह जानकारी पसंद आई हो , जानकारी पसंद आई हो तो आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें |

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Author

  • Auli Manjeet

    मेरा नाम Auli Manjeet है, और मुझे बचपन से ही दुनिया के अनसुलझे रहस्यों, कारों और अद्भुत जगहों को इक्स्प्लोर करने का जबरदस्त शौक रहा है। मेरे मन में हमेशा से ही यह जानने की जिज्ञासा रहती है कि हमारी धरती कितनी अनोखी और रहस्यमयी है और यही जिज्ञासा “Adbhut Rahasya” की शुरुआत का कारण बनी | मेरा मकसद है कि मैं इस ब्लॉग के माध्यम से हर यूजर को सही और सच्ची जानकारी साझा करू ।

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