अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2025 - शिक्षा है अधिकार, ना कि विकल्प

8 सितंबर – साक्षरता के नाम

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस हर साल 8 सितंबर को मनाया जाता है  ये दिन हमें याद दिलाता है की शिक्षा सबका हक़ है।

क्यों मनाते हैं यह दिवस?

यूनेस्को ने 1967 में इसकी शुरुआत की। इसका उद्देश्य है दुनिया से अशिक्षा मिटाना और हर एक को पढ़ने का अधिकार दिलाना।

भारत में साक्षरता की स्थिति कैसी है?

भारत में औसतन 77.7% लोग साक्षर हैं। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में ये आंकड़ा अभी भी चिंता का विषय है।

शिक्षा सिर्फ पढ़ाई नहीं, सोच है!

साक्षरता सिर्फ अक्षर जोड़ना नहीं है, बल्कि खुद के अधिकारों को समझना, फैसले लेना और आत्मनिर्भर बनना है।

लड़कियों की शिक्षा – असली बदलाव

लड़कियों को पढ़ाना पूरे समाज को जागरूक करना है। एक शिक्षित बेटी कई पीढ़ियों को रोशन कर सकती है।

साक्षरता का मतलब डिजिटल होना

आज की दुनिया में डिजिटल साक्षरता भी जरूरी है। इंटरनेट, मोबाइल और तकनीक को समझना भी अब अनिवार्य है

हम क्या कर सकते हैं

आप किसी एक बच्चे को पढ़ने में मदद करें, या एक किताब दान करें – यही असली योगदान है।

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